Posts

Showing posts with the label कायस्थ

वर्ण व्यवस्था को खामोश चैलेंज

बादशाह अकबर ने एक बार बीरबल से कहा कि जमीन पर खिंची लकीर को बिना काटे या मिटाये छोटा करके दिखाओ। बीरबल ने तत्काल उस लकीर के समानान्तर उससे बड़ी लकीर खींच दी और कहा कि देखिये आपकी लकीर छोटी हो गई। यानी बादशाह को उसी की चाल से मात। वर्ण व्यवस्था के संस्थापकों ने कहा कि ब्रह्मा के मुख से ब्राह्मण,भुजा से ठाकुर, जांघ से वैश्य और पैरों की उँगलियों से शूद्रों का जन्म हुआ।अधिकतर लोगों ने इसे स्वीकार कर लिया। लेकिन एक जाति के नुमाइंदों ने बीरबल की तरह इससे बड़ी लकीर खींच दी कि उनके आदि पुरुष का जन्म ब्रह्मा के पूरे शरीर से हुआ है और ब्रह्मा की पूरी काया में स्थित होने के कारण उनकी जाति कायस्थ है। और यह वर्ण व्यवस्था को पहला चैलेंज था। वर्ण व्यवस्था में चारों वर्णों के लिए चार त्यौहार भी नियत थे। ब्राह्मणों का रच्छा बंधन, ठाकुरों का दसहरा, वैश्यों की दिवाली और शूद्रों के लिए होली। दूसरी लकीर यह खींची गई और कहा गया कि कायस्थों का पर्व चित्रगुप्त पूजा है। चारों त्योहारों से इतर। यह सिस्टम को दूसरा चैलेंज था। जाति वर्ण में समाज को बाँटने वालों ने गोत्र की भी कल्पना की। कहा जाता है कि एक ...