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यह बीजेपी की स्ट्रैटिजी है

हरियाणा में विरोधी माने जाने वाले जाट बेस्ड जनतांत्रिक गठबंधन पार्टी (जजपा) के साथ मिलकर सरकार बनाने के बाद बीजेपी ने महाराष्ट्र में विरोधी एनसीपी के साथ सरकार बनाने का दावा कर दिया। साथ ही सीएम और डिप्टी सीएम पद की शपथ भी ले ली। बीजेपी की रणनीति को समझिए। उसने पहले कई राज्यों में ऐसा किया कि स्थानीय लेवल पर दबंग जाति या जातियों का जो दल था, उसके विरोध में चुनाव लड़ा। यह दबंगई कई कारणों से है जिनमें से एक जनसंख्या भी है। उस आधार पर ये जातियां इतराती हैं और चुनाव में खुद को प्रभावशाली बताती हैं। बीजेपी ने बिहार और यूपी में यादवों के खिलाफ कम आबादी वाली जातियों को खामोशी से एकजुट कर दिया और यह प्रतिशत यादवों और उनकी मित्र जाति की संख्या से अधिक हो गया। जो लोग विभिन्न कारणों से इन जातियों के साथ ईजी फील नहीं करते थे, उन्हें बीजेपी ने एक प्लैटफॉर्म दिया। दोनों राज्यों में बीजेपी हुकूमत में है। हरियाणा राज्य की स्थापना के मूल में ही जाट अस्मिता है। जाट इस राज्य पर अपनी चौधराहट समझते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि इस औद्योगिक राज्य में दूसरे राज्यों से आए लोगों की अच्छी-खासी ...

रोम पोप का, रेवाड़ी किस गोप का?

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गुड़गांव के रास्ते जाने पर साबी नदी का यह पुल पार कर ही रेवाड़ी जा सकते हैं बरसों पहले बिहार के मधेपुरा से लालू यादव और शरद यादव चुनाव लड़ते थे और नारा लगता था रोम पोप का, मधेपुरा गोप का। आज हरियाणा के रेवाड़ी में उसी लालू के दामाद चिरंजीव राव कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। मतदाता भले मुखर नही हो रहा हो लेकिन खामोश हवाओ से यही सदा सुनाई देती है कि रेवाड़ी किस गोप का? शरद यादव इस बार कांग्रेस के स्टार प्रचारक हैं।  जहां मैं खड़ा हूं, उसके पीछे साबी नदी के बहाव क्षेत्र के अवशेष हैं। राजस्थान से निकलकर रेवाड़ी की सरहद से होकर गुजरने वाली साबी नदी 40 साल से सूखी है। कभी यह नदी बरसात में लबालब रहती थी। कांग्रेस को देखें तो उसकी हालत साबी नदी जैसी हो रही है। लगातार 5 बार यहां से जीतकर मंत्री बने कैप्टन अजय यादव विधानसभा के पिछले चुनाव में तीसरे नम्बर पर चले गए थे। फिर वह मई में हुआ लोकसभा का चुनाव भी हारे। चिरंजीव राव इन्हीं के बेटे हैं। राजस्थान से बहकर रेवाड़ी आने वाली साबी नदी सूख चुकी है। क्या राजस्थान विधानसभा से कांग्रेस के विजय की जो हवा बही थी, कांग्रे...