Posts

कलपेली भींजल तिवइया हो, उगीं हे दीनानाथ!

Image
ऐ खुदा थोड़ी करम फ़रमाई होना चाहिये इतनी बहनें हैं तो एक भाई होना चाहिए मुनव्वर राणा के इस शेर का कितने 'क्रांतिकारियों' ने विरोध किया ? यदि नहीं तो छठ में ही फॉल्ट क्यों ढूंढ रहे हैं कि यह बेटे का त्योहार है? यह क्यों नहीं मानते कि यह त्योहार सिस्टम को चैलेंज करता है। किसी पुरोहित की जरूरत नहीं, किसी मंत्र की आवश्यक्ता नहीं, किसी मुहूर्त का झंझट नहीं, किसी दक्षिणा की बाध्यता नहीं। खुदा और बन्दे के बीच किसी मुहम्मद की अनिवार्यता नहीं। साक्षात सूर्य और उनके उपासक। इससे बड़ी क्रांति हुई है कभी। और जो लोग रो रहे हैं कि इस पूजा का भी सारा दायित्व महिलाओं पर है वे यह सोचें कि उन असूर्यमपश्या महिलाओं के अंदर विरोध की कितनी चिनगारी थी। वे महिलाएं इनकी तरह सिर्फ गालवीर या कलमवीर नहीं थीं। छठ के गीतों की फिलॉसफी समझिए। गेहूं खरीदने से लेकर नदी किनारे घाट बनवाने और सुबह सूर्य से जल्दी उदित होने की आरजू। ये गीत ऊर्जा देते हैं। कभी पपड़ाये होठों और पानी में कांपते कण्ठों से फूटने वाले गीत, कल्पेली भीजल तिवईया हो उगीं हे दीनानाथ, सुनिए और इस हठ और विनय को समझिए, पता चलेगा कि साध्य को हासिल ...

सम्पूर्ण क्रांति

संपूर्ण क्रांति ऐ मुहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया जाने क्यों आज तेरे नाम पे रोना आया है तो आज बेगम अख्तर का जन्मदिन लेकिन याद जेपी की आ रही है। अमिताभ भी एडवांस में दस्तक दे र...

ये इंतज़ार गलत है कि शाम हो जाये

ये रावण हमेशा शाम में ही क्यों जलता है? दीवाली की पूजा मध्य रात्रि में करने की वजह क्या है? रक्षाबंधन का त्योहार सुबह से ही क्यों मनाया जाता है (हालांकि अब कुछ लोग भद्रा का काल ...

चौबे जी की चांदी और बक्सर की...

Image
बक्सर के सांसद अश्विनी चौबे केंद्रीय मन्त्रिपरिषद में जगह पा गए। पिछली बार बीजेपी ने उनकी पुरानी सीट भागलपुर से लड़ने लायक उन्हें नहीं समझा था, सो बक्सर में धकेल दिए गए। यहां ब्राह्णण समेत upper कास्ट व बीजेपी समर्थक दूसरी जातियों का ऐसा प्लेटफार्म तैयार है कि कोई भी बीजेपी का टिकट लाता तो जीत जाता। चौबे जी भी जीत गए। अब बक्सर क्या सेहतमंद हो जाएगा? विधानसभा चुनाव में भागलपुर सीट पर पुत्र मोह के कारण बीजेपी को बीमार करने का आरोप नए केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री पर लग चुका है। वैसे 28 साल बाद बक्सर का कोई सांसद मन्त्रिपरिषद तक पहुंचा है। थोड़ा परिचय बक्सर में 1952 और 1957 में कमल सिंह निर्दलीय सांसद बने। वह डुमराव की पूर्व रियासत से सम्बन्ध रखते हैं। फिर  1962 में कांग्रेस के एपी शर्मा, 1967 में कांग्रेस के राम सुभग सिंह, 1971 में कांग्रेस के एपी शर्मा, 1977 में भारतीय लोक दल के रामानन्द तिवारी, 1980 और 1984 में कांग्रेस के केके तिवारी, 1989 और 1991 में सीपीआई के तेज नारायण सिंह, 1996, 98, 99 और 2004 में बीजेपी के लालमुनि चौबे, 2009 में राजद के जगतानन्द सिंह और 2014 में अश्विन...

युवा डीएम ने खुदकुशी की

Image
बक्सर के डीएम मुकेश पांडेय ने गाज़ियाबाद में ट्रेन से कट कर खुदकुशी कर ली है। 2012 बैच के आईएएस मुकेश ने इसी महीने बक्सर में जॉइन किया था। बिहार में पिछले महीने के आखिरी दिनों मे...

धर्म ही पूछ लो सबका

Image
अमरनाथ यात्रियों पर हमले के बाद कश्मीर में पहला हिन्दू आतंकी संदीप पकड़ा गया है, ये न्यूज़ चर्चा में है। जब आतंकियों का धर्म नहीं होता तो फिर इसके धर्म वाले पॉइंट को इतना क्यों उछाला जा रहा है? क्या इसके पहले किसी आतंकी का धर्म बताया जाता था। तो क्या यह मान लिया गया था कि हिन्दू धर्म में कोई आतंकी हो ही नहीं सकता? हत्या गलत है और धार्मिक पहचान के आधार पर हत्या तो महापाप है। खबरें यह भी हैं कि वेस्टर्न यूपी का संदीप नाम का यह शख्स 3 साल पहले धर्मांतरण कर इस्लाम अपना चुका था और उसने अपना नाम आदिल रख लिया था। तो धर्मांतरण के बाद उसकी पुरानी धार्मिक पहचान क्यों नहीं खत्म हुई? सिर्फ इस थ्योरी को सपोर्ट करने के लिये कि हिन्दू भी आतंकी हो सकता है। जुनैद मर्डर केस यही हालत जुनैद और इख़लाक़ के मामले में है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 22 जून को गाज़ियाबाद मथुरा शटल में मारे गए जुनैद के पूर्वज वशिष्ठ गोत्र के ब्राह्मण थे और फरीदाबाद के बघौला गांव के थे। जुनैद के एक पूर्वज ने इस्लाम अपना लिया और वे लोग फरीदाबाद के खन्दावली गांव में रहने लगे थे। जब जुनैद की हत्या हुई तो इसे एक मुस...

सरकार-3

Image
26 मई, मोदी सरकार के तीन साल। अजीब संयोग है कि 2010 में गुजरात पर्यटन के ब्रैंड एंबेसडर बने अमिताभ बच्चन की फिल्म सरकार-3 भी इसी साल आई। महानायक की फिल्म चली नहीं और केंद्र सरकार की फिल्म अभी दो साल और चलनी है। इसे दर्शकों (वोटरों) का जो रेस्पॉन्स मिला है उससे आशंका भी नहीं है कि इंटरवल के तत्काल बाद इस पर पर्दा गिर जाए। मख अश्व इस सरकार ने आते ही अपने अश्वमेध का घोड़ा छोड़ दिया जो बिहार और दिल्ली को छोड़कर चारों ओर विजय पताका फहराता घूम रहा है। लोकल बॉडी से लेकर विधानसभाओं त क और कच्छ से कामरूप तक। लेकिन इस सरकार के दो मंत्रियों की परफॉर्मेंस पर गौर करना जरूरी है। गाय-गंगा का जाप करने वाली उमा भारती का और ट्विटर ब्वॉय सुरेश प्रभु का। उमा की जटा में फंसी गंगा गंगा की हालत सुधारने का जिम्मा उमा भारती को दिया गया और उनके लिए खास मंत्रालय बनाया गया। तीन साल में उनका काम सर्वे से आगे नहीं बढ़ पाया है। गंगा किनारे लगे उनके नाम के पत्थर राजनीतिक रूप से उमा को प्राणवायु दे रहे हैं और बगल में गंगा ऑक्सीजन विहीन होती जा रही है। क्या गंगा की गंदगी जानने के लिए किसी सर...