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तू चांद है...

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वह चांद जो सदियों से रोज़ छत पर आता है, मुंडेर पर आता है, नदी किनारे आता है, आंगन में आता है, बच्चों के लिए सोने के कटोरे में दूध-भात लाता है, उनके साथ खेलता है वह हमसे इतनी दूर है, यकीन नहीं होता। कहा जाता है कि जब भगवान राम का जन्म हुआ तो सूर्यास्त हो ही नहीं रहा था। जब सारे देवी-देवताओं ने भगवान राम के दर्शन कर लिए तब रात हुई और चांद को भगवान राम का दर्शन करने का मौका मिला था। चांद ने उलाहना भरे शब्दों में इसकी शिकायत राम से की थी और यह गलती मानते हुए राम ने अपने नाम के साथ ही चन्द्र को स्थापित किया। सूर्यवंशी राम इसीलिए रामचंद्र हुए। वह चांद जो रात में रास्ता दिखाता है, कभी किसी चौबारे पर चमकता है तो कभी कहीं जुल्फों की घनी छांव में छुपने की कोशिश करता है, कभी किसी के बाजुओं में कसमसाता है तो कहीं किसी के होठों पर फिसलता है। कभी किसी की करधन में समाता है तो कभी किसी की हंसली बनकर नितांत व्यक्तिगत क्षणों में चुभन का अहसास कराता है। वह चांद जो हर पल हमारे साथ होता है, वह इतनी दूर है कि पहुंचने में 48 दिन लग गए। वह भी दो किमी प्रति सेकंड की स्पीड पर। वह चां...

कोसने से पहले सोचिए

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यह है गाजियाबाद संसदीय क्षेत्र का दलित मोहल्ला बीचफटा। यहां लोगों ने साफ कहा कि उनके कच्चे मकान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के हो रहे हैं और वे बीजेपी के अलावा किसी और को वोट नहीं देंगे। चुनाव आयोग ने कई जगहों पर रोक विजय जुलूस निकालने पर लगाई है, लेकिन मातम मनाने पर नहीं, इसलिए पानी पी पीकर कोसिए। लेकिन आपको यह बताना होगा कि 5 साल तक सिवाय कोसने के आपने क्या किया है? यह सवाल कांग्रेस से भी है और लेफ्ट से भी। आप अपने समर्थकों के साथ आभासी दुनिया में मोदी को कोसते रहे। राजस्थान, एमपी और छतीसगढ़ में जीत के बाद आप इतराते रहे लेकिन यह समझ नहीं पाए कि वहां की जनता का गुस्सा इस हार के साथ उतर गया है और वे लोकसभा चुनाव में मोदी के साथ आएंगे। राजस्थान ने तो खुलकर कहा था कि मोदी तुझसे बैर नहीं, रानी तेरी खैर नहीं। आप नारे का मर्म समझने की जगह कोसने में तल्लीन रहे।  एनसीआर में इखलाक और जुनैद हत्याकांड हुए। सीपीएम की वृंदा करात की आवाजाही वहां लगी रही। उसी दौरान दिल्ली में एक मुस्लिम लड़की से प्रेम करनेवाले फोटोग्राफर अंकित सक्सेना की हत्या कर दी गई। वृंदा क्या, कोई अदना वामपंथी...

बेगूसराय बनाम बगोदर

पहले बिहार फिर झारखंड के गिरिडीह जिले की बगोदर विधानसभा सीट से लड़ते और जीतते थे। विधायक रहते हुए शहीद हुए। हमलावरों ने जब पूछा कि तुममे से कौन है महेंद्र सिंह तो निर्भीक हो ...

किसकी गोद में वामपंथ ; जसोदा मैया या पूतना के

आज ही की तरह वह सम्भवतः 31 मार्च 1997 की तारीख थी। बिहार में गरीब-गुरबों और सामाजिक न्याय की सरकार थी। जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष रह चुके आइसा से जुड़े चंद्रशेखर सिवान में व्यवस्...

यह नुमाइश सराब की सी है

हस्ती अपनी हबाब की- सी है यह नुमाइश सराब की- सी है नाज़ुकी उसके लब की क्या कहिए पंखुड़ी इक गुलाब की- सी है मीर तकी मीर ने कई साल पहले जब यह रचना की तो सराब का इस्तेमाल बड़ी नज़ाकत से कि...

चुनावी चैता

पिया नाही अइले हो रामा, पिया नाही अइले, बीत गइले सउँसे चइतवा हो रामा पिया नाही अइले। जैसे ही कॉमरेड चंदू ने चैती गाना शुरू किया, भाजपाई दीनानाथ भड़क गए। खूब बूझते हैं हम इसका म...

होली को नष्ट कर रही यह शिष्टता

हरसु ने गुलेल को दुरुस्त कर लिया था। मिट्टी की गोलियां बनाकर उन्हें धूप में सूखा ही नहीं लिया था, बल्कि कंचे भी खरीद लिए थे। कानून व्यवस्था सम्भालने को चौकस दरोगा की तरह गोल...