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जाके पैर न फटे बिवाई

सामान्य रूप से पैर टूटना कितनी बड़ी बीमारी है। इसका इलाज सदर अस्पताल में हो सकता है या नहीं? जिस सरकारी अस्पताल में आर्थों का डॉक्टर मौजूद हो, वह क्या ऐसे पेशंट को हायर सेंटर रेफर करेगा? वह भी तब, जबकि पेशंट चाहे तो ऑर्डर जारी कर रूई, बैंडेज और दूसरे सामान का इंतजाम ही नहीं कर सकता, बल्कि कुछ की बहाली भी करा सकता हो। हे राम लेकिन हुआ ऐसा। बाबा गए तो थे भगवान राम का आशीर्वाद लेने, लेकिन मंजिल पर पहुंचकर लड़खड़ा गए। सीढ़ियों पर अपना वजन संभालना मुश्किल हो गया और नतीजा एड़ी के पास वाली हड्डी बुढ़ापे में चटक गई। हालांकि बाबा इसके बाद भी कहते रहे कि रामजी ने और गिरने से रोक लिया। बाबा का भौकाल टाइट है  तो हकीम भी मौके पर मौजूद थे। टांग टूटी थी बाबा की, लेकिन पैर डॉक्टर साहब के कांपने लगे। वजह का तो पता नहीं लेकिन कुछ लोग चुगली कर रहे हैं कि सदर अस्पताल में टूटी हड्डी का एक्सरे करने वाली मशीन महीनों से खराब है। अब कई महीनों से किसी वजनी जीव की हड्डी टूटी नहीं तो घूरहू-कतवारू का क्या एक्सरे करना? उन्हें तो देखकर बताया जा सकता है कि हड्डी टूटी है या नहीं? चूंकि मामल...

एयर इमरजेंसी न लगा दे लिट्टी-भंटा का मेला

अब यह बात स्थापित कर ही दी गई है कि दिल्ली-एनसीआर के आकाश पर छाया प्रदूषण पंजाब में जली पराली की देन है। शुक्रवार से थोड़ी राहत मिलने लगी है यानी पंजाब के किसान पुआल जला चुके ह...

जाने क्यों आकाश में कोहरा घना है

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खेती की जमीन कम होती जा रही है और पुआल जलाने से प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के नियंताओं और मौसम वैज्ञानिकों, जलता हुआ पुआल ही है न बढ़ते प्रदूषण की बड़ी वजह? क्योंकि वृक्षारोपण सरकार और ngo करवा ही रहे हैं, नगर निगम की सड़कों की सफाई मशीनों से हो ही रही है। प्रदूषण कंट्रोल करने की योजना बनाने और इसके एवज में सैलरी लेनेवाले अपना काम कर ही रहे हैं। बिल्डर कंस्ट्रक्शन के मानकों से सूत भर भी इधर-उधर  हो ही नहीं रहे हैं। पर्यावरण को लेकर काम करने वाले और इसके लिए सम्मानित होने वाले एक्टिविस्ट और जर्नलिस्ट अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा ही रहे हैं। सड़कों पर जाम न लगे, और एयर प्रदूषण न फैले, इसके उपाय बताने वाले लालाओं ने फुटपाथ पर पार्किंग बन्द कर ही दी है। आपकी मेहनत नदियों की हालत सुधारने के लिए उमा भारती की अगुआई में बने मंत्रालय (अब उमा हटाई जा चुकी हैं) ने गंगा यमुना समेत तमाम नदियों को जिंदा कर ही दिया है। गांव के तालाबों से कब्जा हटाकर उन्हें फिर से लबालब भर ही दिया गया है। जोहड़ कागजों से निकलकर जमीन पर आ गए हैं। राधा फिर यमुना किनारे मटकी लेकर जाने लगी हैं। परिं...

कलपेली भींजल तिवइया हो, उगीं हे दीनानाथ!

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ऐ खुदा थोड़ी करम फ़रमाई होना चाहिये इतनी बहनें हैं तो एक भाई होना चाहिए मुनव्वर राणा के इस शेर का कितने 'क्रांतिकारियों' ने विरोध किया ? यदि नहीं तो छठ में ही फॉल्ट क्यों ढूंढ रहे हैं कि यह बेटे का त्योहार है? यह क्यों नहीं मानते कि यह त्योहार सिस्टम को चैलेंज करता है। किसी पुरोहित की जरूरत नहीं, किसी मंत्र की आवश्यक्ता नहीं, किसी मुहूर्त का झंझट नहीं, किसी दक्षिणा की बाध्यता नहीं। खुदा और बन्दे के बीच किसी मुहम्मद की अनिवार्यता नहीं। साक्षात सूर्य और उनके उपासक। इससे बड़ी क्रांति हुई है कभी। और जो लोग रो रहे हैं कि इस पूजा का भी सारा दायित्व महिलाओं पर है वे यह सोचें कि उन असूर्यमपश्या महिलाओं के अंदर विरोध की कितनी चिनगारी थी। वे महिलाएं इनकी तरह सिर्फ गालवीर या कलमवीर नहीं थीं। छठ के गीतों की फिलॉसफी समझिए। गेहूं खरीदने से लेकर नदी किनारे घाट बनवाने और सुबह सूर्य से जल्दी उदित होने की आरजू। ये गीत ऊर्जा देते हैं। कभी पपड़ाये होठों और पानी में कांपते कण्ठों से फूटने वाले गीत, कल्पेली भीजल तिवईया हो उगीं हे दीनानाथ, सुनिए और इस हठ और विनय को समझिए, पता चलेगा कि साध्य को हासिल ...

सम्पूर्ण क्रांति

संपूर्ण क्रांति ऐ मुहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया जाने क्यों आज तेरे नाम पे रोना आया है तो आज बेगम अख्तर का जन्मदिन लेकिन याद जेपी की आ रही है। अमिताभ भी एडवांस में दस्तक दे र...

ये इंतज़ार गलत है कि शाम हो जाये

ये रावण हमेशा शाम में ही क्यों जलता है? दीवाली की पूजा मध्य रात्रि में करने की वजह क्या है? रक्षाबंधन का त्योहार सुबह से ही क्यों मनाया जाता है (हालांकि अब कुछ लोग भद्रा का काल ...

चौबे जी की चांदी और बक्सर की...

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बक्सर के सांसद अश्विनी चौबे केंद्रीय मन्त्रिपरिषद में जगह पा गए। पिछली बार बीजेपी ने उनकी पुरानी सीट भागलपुर से लड़ने लायक उन्हें नहीं समझा था, सो बक्सर में धकेल दिए गए। यहां ब्राह्णण समेत upper कास्ट व बीजेपी समर्थक दूसरी जातियों का ऐसा प्लेटफार्म तैयार है कि कोई भी बीजेपी का टिकट लाता तो जीत जाता। चौबे जी भी जीत गए। अब बक्सर क्या सेहतमंद हो जाएगा? विधानसभा चुनाव में भागलपुर सीट पर पुत्र मोह के कारण बीजेपी को बीमार करने का आरोप नए केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री पर लग चुका है। वैसे 28 साल बाद बक्सर का कोई सांसद मन्त्रिपरिषद तक पहुंचा है। थोड़ा परिचय बक्सर में 1952 और 1957 में कमल सिंह निर्दलीय सांसद बने। वह डुमराव की पूर्व रियासत से सम्बन्ध रखते हैं। फिर  1962 में कांग्रेस के एपी शर्मा, 1967 में कांग्रेस के राम सुभग सिंह, 1971 में कांग्रेस के एपी शर्मा, 1977 में भारतीय लोक दल के रामानन्द तिवारी, 1980 और 1984 में कांग्रेस के केके तिवारी, 1989 और 1991 में सीपीआई के तेज नारायण सिंह, 1996, 98, 99 और 2004 में बीजेपी के लालमुनि चौबे, 2009 में राजद के जगतानन्द सिंह और 2014 में अश्विन...