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How Can You रोक

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रविवार 26 जून को आजमगढ़ (Azamgarh) में जब लोकसभा उपचुनाव (Loksabha Bypoll) की काउंटिंग चल रही थी, तब सपा प्रत्याशी धर्मेंद्र यादव (Dharmendra Yadav) का एक विडियो वायरल हुआ, जिसमें वह एक पुलिस अधिकारी को हड़काने की कोशिश करते हुए कह रहे हैं कि How Can You Rok. इस हिंग्लिश का मतलब यह था कि तुम मुझे यानी कैंडिडेट को जाने से कैसे रोक सकते हो? वह पुलिस अधिकारी से उलझे हुए थे और उधर बीजेपी उनके लोकसभा में जाने का रास्ता रोक चुकी थी। नतीजे आए तो सपा 8679 वोटों से हार चुकी थी। इस सीट पर बीजेपी (BJP) कैंडिडेट दिनेश लाल यादव (Dinesh Lal Yadav) निरहुआ (Nirahua) को  3 लाख 12 हजार 768 वोट मिले। सपा कैंडिडेट धर्मेंद्र यादव को 3 लाख 4 हजार 89 और बसपा के गु़ड्डू जमाली को 2 लाख 66 हजार 210 वोट मिले। सपा के लोग कह रहे हैं कि बसपा (BSP) बीजेपी की बी टीम हो गई है और इनके गठबंधन ने सपा को हराया। इसके जवाब में बसपा कैंडिडेट ने कहा कि यह तो मैं भी कह सकता हूं कि सपा की वजह से बसपा हारी। आप मेरे वोट देख लीजिए कि क्या हम बीजेपी की बी टीम हैं? पूरे चुनाव में अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने रामपुर (Rampur) औ...

होली को नष्ट कर रही यह शिष्टता

हरसु ने गुलेल को दुरुस्त कर लिया था। मिट्टी की गोलियां बनाकर उन्हें धूप में सूखा ही नहीं लिया था, बल्कि कंचे भी खरीद लिए थे। कानून-व्यवस्था सम्भालने को चौकस दरोगा की तरह गोलियों की थैली कमर में लुंगी में बांध ली थी। इस प्रक्रिया में लुंगी की लंबाई घुटनों तक आ गई थी। गुलेल शोले के गब्बर सिंह की बंदूक की तरह कंधे पर विराजमान थी। बस अब इंतज़ार था होली का। बस इस बार कोई छेड़े और फिर स्वरचित गालियों के साथ लखेदा-लखेदी शुरू। कई साल से ऐसा होता आ रहा था। हरसु मिठाई की दुकान पर खड़े हैं। कोई उन्हें जलेबी ऑफर करता है तभी पीछे से कोई एक मग चाशनी उनके सिर पर डाल देता है। चाशनी डालने वाला तो भाग जाता लेकिन ऑफर करने वाला उनकी मौलिक गालियों की जद में आ जाता। इसी बीच जब वह आंखों में पड़ी चाशनी को साफ करते रहते, कोई उनकी लुंगी खींच देता। ये अलग बात है कि फिर किसी को पंचायत करनी पड़ती और हरसु को जलेबी के साथ चाय भी पिलानी पड़ती, तभी वह मानते। कुछ साल पहले होली के दौरान मुलाकात हुई थी। अपने दरवाजे पर खड़े नॉनस्टॉप गाली दे रहे थे, लेकिन इस बार गलियों में मौलिकता और उत्साह का तत्व कम था। क्या हुआ? पता चला अपने घ...

यूपी : यह तो होना ही था, पर सीटें इतनी कम !

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10 फरवरी 2022 को नोएडा से दादरी के चिटेहरा जाते हुए इस रास्ते से जाना हुआ। दूर तक फैले खेत और बीच में एक कमरे पर लहराता भाजपा का झंडा। चारों तरफ फसलें लहलहा रही थीं और मानो कह रही थीं कि ये सामान्य फसलें नहीं, वोट की फसलें हैं। और जब परिणाम आए तो यह गलत भी साबित नहीं हुआ। यूपी संग्राम का पहला चरण जहां 10 फरवरी को वोटिंग हुई थी, उसमें नोएडा-बुलंदशहर, गाजिियाबाद, हापुड़ और मधुरा जिले की सभी सीटें बीजेपी ने जीत ली। हापुड़ की धौलाना सीट तो बीजेपी पहली बार जीती। यह वही सीट है, जिस इलाके में एआईएमआईएम चीफ असद्दुदीन ओवैसी की कार पर फायरिंग हुई थी। हालांकि इतनी योजनाओं के बाद भी बीजेपी की इतनी कम सीटें क्यों आईं, यह बहस का मसला है। साफ-साफ दिख रहा था कि यूपी में कास्ट और क्लास की लड़ाई चल रही है। इसमें क्लास को जीतना था वह जीता। (क्या थी कास्ट और क्लास की लड़ाई, जानने के लिए पढ़ें ब्लॉग http://boldilse.blogspot.com/2022/02/blog-post.html  बीजेपी : हालांकि बीजेपी को उतनी सीटें नहीं मिलीं, जितनी क्लास वाले फॉर्म्युले के मुताबिक मिलनी चाहिए थी। अगर किसान सम्मान निधि प्रभावी थी, तो हर सीट...

यूक्रेन-अफगानिस्तान और यूपी चुनाव का सातवां चरण

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बनारस के अस्सी में पप्पू की अड़ी (दुकान) पर मिनी पार्लियामेंट चल रही है। कल प्रधानमंत्री यहां से चाय पीकर जा चुके हैं। इस पार्लियामेंट की खासियत यह है कि यहां मुद्दे के मुताबिक सदन के अध्यक्ष बदलते रहते हैं। चाहे अपनी सीट पर से बोलो चाहे वेल में जाओ, कोई पाबंदी नहीं है। हर-हर महादेव। शंकर जी के त्रिशूल पर बसे इस नगर में भी रूस और यूक्रेन के बहाने लोकल चुनाव और कैंडिडेट चर्चा में हैं। लोग गाजीपुर जिले की एक सीट को यूक्रेन बता रहे हैं और वहां के एक उम्मीदवार को जेलेन्सकी। यूक्रेन की तरह यह प्रत्याशी भी रूस से अलग हुए हैं और अब उसी को आंखें दिखाते हुए लाल-पीले हो रहे हैं। प्रत्याशी के बड़बोलेपन पर लोग मज़े ले रहे हैं और उन्हें मंच से गाने के बोल सुनाते देख दाद दे रहे हैं। लोग बतिया रहे हैं कि इन्हें भी किसी नाटो ने चढ़ा दिया है। अब यह सबकी गर्मी शांत करने की धमकी दे रहे हैं। अगर चुनाव के बाद नाटो कही कमज़ोर पड़ा तो इसका क्या होगा? वैसे भी जो समीकरण है, उसमें इस जेलेन्सकी की सीट जहुआ (भोजपुरी शब्द जिसका अर्थ गड़बड़ाना होता है) रही है।  बनारसियों की निगाह में मऊ जिले की एक सीट अफगानिस्तान हो गई...

परिवारवाद बढ़ा रहे छोटे दल

1989 में केंद्र की राजीव गांधी सरकार के पतन और बाद में वीपी सिंह की परफॉर्मेंस से निराश वोटरों ने छोटे दलों को उनके विकल्प के रूप में स्वीकार करना शुरू किया। बिहार में लालू यादव, नीतीश कुमार यूपी में मुलायम सिंह यादव और मायावती का उदय हो चुका था।  हालांकि कम्युनिस्ट पार्टियां तब तक अप्रासंगिक नहीं हुई थीं। हालांकि लोगों का मोहभंग भी जल्दी ही क्षेत्रीय पार्टियों से होने लगा, जब स्पष्ट जनादेश नहीं मिलने के कारण 1996, 1998 और 1999 में लोकसभा चुनाव हुए। अस्थिरता का दौर शुरू हुआ। इसके बाद फिर एनडीए की सरकार आई जिसने अपने कार्यकाल पूरा किया। इसे बीजेपी लीड कर रही थी। उसके बाद कांग्रेस के नेतृत्व में दो बार यूपीए की सरकार बनी। फिर दो बार से बीजेपी अपने दम पर सरकार बना रही है। अभी पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं। यूपी में अपना दल (एस) का गठबंधन भाजपा के साथ है। अपना दल (एस) की प्रमुख अनुप्रिया पटेल केंद्र में मंत्री हैं। उनकी बहन पल्लवी पटेल और मां कृष्णा पटेल का दूसरा संगठन है जिसका नाम अपना दल (क) है।  पिछले दिनों जब प्रतापगढ़ सदर सीट से अपना दल (क) से कृष्णा पटेल उम्मीदव...

पिंडरा : चर्चा में कोई और, हालात कुछ और संकेत दे रहे हैं

बनारस जिले की पिंडरा विधानसभा सीट। यह क्षेत्र पार्टी से अधिक प्रत्याशियों के नाम से चर्चा में रहता है। फिलहाल पिंडरा कहते ही कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय का नाम पहले आता है, जो कि पूर्व विधायक हैं और पिछला चुनाव हार चुके हैं। 2012 में यह सीट अस्तित्व में आई थी, उसके पहले यह कोलअसला सीट थी, जिस पर सीपीआई के उदल नौ बार विजयी हुए थे। तब कोलअसला सीट सीपीआई से अधिक उदल के नाम से जानी जाती थी। बीजेपी प्रत्याशी अवधेश सिंह भले यहां के सिटिंग एमएलए हों, लेकिन चर्चा में अजय राय आगे हैं। वह भी तब जबकि पिछली बार अजय राय तीसरे नंबर पर रहे थे और उन्हें 50 हजार वोट भी नहीं मिले थे। 2017 के चुनाव में बसपा दूसरे नंबर पर रही थी। सपा ने इस बार यह सीट गठबंधन के तहत अपना दल कमेरावादी को दी है। अजय राय 2019 में भी चर्चा में आए थे,जब उन्होंने बनारस संसदीय सीट से नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ा था। इस बार की राजनीति करखियांव गांव में बन रहे अमूल दूध के प्लांट के इर्द-गिर्द घूमती दिख रही है। बीजेपी इसे जहां क्षेत्र का विकास मानते हुए अपने पक्ष में मान रही है, वही विपक्षी दलों का कहना है कि बीजेपी इसी मिल्क प्ला...

जहूराबाद : वर्तमान और भूतपूर्व विधायकों में अभूतपूर्व लड़ाई

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फोटो गूगल से साभार  बहादुरशाह जफर का शेर है : जाहिर हैं क्या जहूर के मजहर नए-नए, जलवे हैं उसके पर्दे के अंदर नए-नए जहूर के मजहर देखने का विचार थोड़ी देर मुल्तवी कर चलते हैं गाजीपुर जिले की जहूराबाद विधानसभा सीट पर, जहां नए नजारे दिखाने की बात कही जा रही है, जुबानी फिसलन ताड़ी घाट तक जाकर भी रुकती नहीं दिखती, दिलदारों का नगर (दिलदारनगर) पास में ही है, लेकिन कमजर्फो साफ दिख रही है। यहां वर्तमान और दो भूतपूर्व विधायकों के बीच अभूतपूर्व जंग है। सीट जिले के लिहाज से गाजीपुर में है और संसदीय क्षेत्र के हिसाब से बलिया में। इस सीट से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर खुदै गठबंधन के उम्मीदवार हैं। मीडिया रिपोर्ट्स है कि हाल ही में उन्होंने गाजीपुर की सभा में कहा था कि वह सीएम योगी को लखनऊ की गद्दी से हटाकर वहां भेजेंगे, जहां भीख मांगने की ट्रेनिंग दी जाती है। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कई बार कहा कि जब वह योगी सरकार में मंत्री थे तब भी मुख्तार अंसारी से मिलने पंजाब की रोपड़ जेल में जाते थे। प्रदेश की बांदा जेल में भी उनसे कई बार मुलाकात हुई।  ओमप्रकाश राजभर भले आत्...